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'तांडव' के निर्माताओं के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार दर्ज करेगी मामला, नरोत्तम ने अखिलेश पर किया पलटवार

अली अब्बास जफर की वेब सीरिज तांडव पर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। जहां भाजपा ने इस सीरिज को बैन करने की मांग की है। वहीं इसपर राजनीतिक बयानबाजी का भी दौर शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तांडव पर दर्ज हुई एफआईआर के बहाने योगी सरकार पर हमला बोला था। अब इसे लेकर मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने उनसे पूछा है कि आखिर हर बार हिंदू धर्म ही क्यों निशाने पर आता है।

नरोत्तम मिश्रा ने मंगलवार को कहा, 'जो भी विषय हिंदू धर्म के खिलाफ होता है उस पर अखिलेश यादव जैसे लोग तांडव करते हैं। मेरा उनसे सवाल है कि आज तक जितनी भी फिल्में बनी हिंदू धर्म के अलावा कभी किसी धर्म पर टिप्पणी की गई क्या? आखिर हिंदू धर्म ही हर बार क्यों निशाने पर आता है, इस पर कोई तांडव करता है और हम विरोध करते हैं तो उन्हें क्यों बुरा लगता है इसका जवाब उन्हें देना चाहिए।'
 


तांडव’ के निर्माताओं के खिलाफ राज्य सरकार दर्ज करेगी मामला
मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मंगलवार को कहा कि ‘अमेजन प्राइम वीडियो’ पर दिखाई जा रही वेब सीरीज ‘तांडव’ के निर्माताओं के खिलाफ प्रदेश सरकार कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का मामला दर्ज करेगी। पत्रकारों द्वारा अमेजन प्राइम की वेब सीरीज ‘तांडव’ के बारे में पूछे जाने पर मिश्रा ने कहा, 'जीशान अयूब, सैफ अली खान और अब्बास जफर ने जिस तरह से हमारे धर्म पर प्रतिक्रिया दी और हमारी भावनाओं को आहत किया, उसकी मैं निंदा करता हूं। मध्यप्रदेश सरकार इस संबंध में एक मामला दर्ज करेगी।'

यह भी पढ़ें- किसानों के मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए भाजपा तांडव पर करा रही ‘तांडव’ : अखिलेश 

इससे पहले, सोमवार को मध्यप्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग और राज्य विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से अपील की थी कि वे हिंदू देवी-देवताओं का कथित तौर पर उपहास उड़ाने के आरोप में अमेजन प्राइम वीडियो की सीरीज 'तांडव' पर प्रतिबंध लगाया जाए।
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‘तांडव’ विवाद : शिवराज सिंह चौहान ने की ओटीटी प्लेफॉर्म पर अंकुश लगाने की वकालत

वेब सीरीज तांडव को लेकर उठे विवाद के बीच मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी ओटीटी प्लेटफॉर्म को लेकर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने सोमवार को ओटीटी प्लेटफॉर्म की निगरानी करने और इस पर अंकुश लगाने की वकालत की है। 

शिवराज सिंह चौहान ने अपने बयान में कहा कि हमारी आस्था पर चोट करने का अधिकार किसी को नहीं है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर निगरानी की जरूरत है। इस प्लेटफॉर्म पर जो अश्लीलता परोसी जा रही है, वह हमारे किशोरों को गलत दिशा में ले जा रही है। इस पर अंकुश जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर भारत सरकार काफी गंभीर है।

बता दें कि अमेजन प्राइम वीडियो पर प्रसारित ‘तांडव’ वेब सीरीज के एक दृश्य को लेकर शुरू हुए विवाद के मामले में इसके निर्माताओं ने सोमवार को बिना शर्त माफी मांगी और कहा कि उनका किसी की भावनाओं को चोट पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। वेब सीरीज के एक एपिसोड में कथित तौर पर 'धार्मिक भावनाएं' आहत होने की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई थी।

‘तांडव’ के कास्ट एवं क्रू की ओर से जारी आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया कि वेब सीरीज तांडव पर दर्शकों की प्रतिक्रिया पर हम करीब से नजर रख रहे हैं और आज एक चर्चा के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने हमें बताया कि उन्हें वेब सीरीज के विभिन्न पहलुओं को लेकर बड़ी संख्या में शिकायतें और अर्जियां मिली हैं जो इसकी सामग्री द्वारा लोगों की भावनाओं को आहत करने संबंधी गंभीर चिंताओं और आशंकाओं के बारे में हैं।

वक्तव्य में कहा गया है कि तांडव एक काल्पनिक कहानी पर आधारित है और किसी भी गतिविधि, व्यक्ति या घटना से इसकी समानता होना विशुद्ध रूप से संयोग है। इसके निर्माताओं और कलाकारों का किसी व्यक्ति, जाति, समुदाय, धर्म की भावनाओं या धार्मिक आस्थाओं को आहत करने या किसी संस्था, राजनीतिक दल अथवा व्यक्ति (जीवित या मृत) का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था।

इसमें कहा गया कि तांडव की पूरी यूनिट लोगों द्वारा जताई गई चिंताओं पर संज्ञान लेती है और यदि इससे गैर-इरादतन तरीके से किसी व्यक्ति की भावनाओं को चोट पहुंची है तो हम बिना शर्त माफी मांगते हैं।
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

किसान आंदोलनः पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा-दोनों पक्ष अहंकार व हठ छोड़ें

पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने किसान आंदोलन को लेकर शुक्रवार को अपनी राय रखी। उमा भारती ने कहा कि सरकार व किसान नेताओं के सामने किसानों की समस्याएं हल करने का यही मौका है और इसमें दोनों पक्षों को अहंकार व हठ छोड़कर काम करना होगा। 

शुक्रवार को भोपाल स्थित अपने निवास पर पत्रकारों से उमा भारती ने कहा कि किसान आंदोलन में किसान नेताओं को राजनीति नहीं आने देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘ 30 साल बाद किसान जमा हुए हैं। सरकार के पास भी यही मौका है। इसलिए मोदी जी (प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी) के सामने भी बहुत बड़ा अवसर आया है और किसानों के सामने भी अवसर है। इस अवसर पर दोनों पक्षों को अहंकार और हठ से मुक्त होकर काम करना होगा।’  

उमा भारती ने 30 साल पहले दिल्ली में किसान नेता महेन्द्र सिंह टिकैत और शरद जोशी के किसान आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि दोनों किसान नेताओं में तब कोई मतभेद नहीं थे लेकिन उनके समर्थकों के बीच मंच पर ही संघर्ष हो गया था।

केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर किसान दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर पिछले दो महीने से अधिक समय से आंदोलन कर रहे है। किसान नेताओं और सरकार के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन अब तक इस मामले में समाधान नहीं निकला है।

किसानों को आशंका है नए कृषि कानूनों से देश भर में कृषि उपज मंडियों और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बंद करने का रास्ता बनाया जा रहा है।
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व्यापमं घोटाला: असल के बदले परीक्षा देने वाले पटना के युवक को पांच साल की जेल

मध्य प्रदेश के  चर्चित व्यापमं घोटाले से जुड़े पीएमटी फर्जीवाड़े के मामले में इंदौर की विशेष अदालत ने 39 वर्षीय व्यक्ति को शुक्रवार को पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। 

व्यापमं घोटाले के मामलों के लिए गठित विशेष अदालत के न्यायाधीश यतीन्द्र कुमार गुरु ने मनीष कुमार सिन्हा (39) को मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम की सम्बद्ध धाराओं के साथ ही भारतीय दंड विधान की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (दस्तावेजों की जालसाजी) और अन्य प्रावधानों के तहत दोषी करार दिया। मुजरिम, बिहार की राजधानी पटना से ताल्लुक रखता है।

त्रिवेदिया की जगह बैठा था
मामले की जांच करने वाली सीबीआई ने विशेष अदालत में सिन्हा पर आरोप साबित किया कि वह व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा वर्ष 2004 में आयोजित प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) के दौरान खंडवा स्थित परीक्षा केंद्र में संत कुमार त्रिवेदिया नाम के मूल उम्मीदवार के स्थान पर बैठा था। त्रिवेदिया, मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले का रहने वाला है। विशेष लोक अभियोजक रंजन शर्मा ने सीबीआई की ओर से पैरवी करते हुए सिन्हा पर जुर्म साबित करने के लिए अदालत में 21 गवाह पेश किए।

 फोटो मेल नहीं खा रहा था 
अभियोजन के मुताबिक फर्जीवाडे़ का खुलासा तब हुआ, जब परीक्षा केंद्र में एक पर्यवेक्षक ने पाया कि सिन्हा के पास मिले प्रवेश पत्र पर नाम तो त्रिवेदिया का ही लिखा हुआ है, लेकिन इस दस्तावेज पर चस्पा फोटो सिन्हा के चेहरे से मेल नहीं खा रहा है। अभियोजन के मुताबिक सिन्हा कथित रूप से धन के बदले मध्यप्रदेश के पीएमटी फर्जीवाड़े में शामिल हुआ था।

उच्चतम न्यायालय के वर्ष 2015 में दिए गए आदेश के तहत व्यापमं घोटाले से जुड़े मामलों की जांच सीबीआई कर रही है। व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) की आयोजित प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली सामने आने के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने इसका आधिकारिक नाम बदलकर "प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड" कर दिया है।
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मध्यप्रदेश: शिवराज सरकार में पूरी हुई सिंधिया की 'मुराद', भोपाल में मिला सरकारी आवास

भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को आखिरकार भोपाल में सरकारी बंगला मिल गया है। वे इसका पिछले ढाई साल से इंतजार कर रहे थे। उन्होंने 23 मई 2018 को इस बंगले के लिए आवेदन किया था। उस समय राज्य में भाजपा की सरकार थी और विधानसभा के चुनाव होने वाले थे।

अपने आवेदन में सिंधिया ने निवेदन किया था कि बिना देर किए उन्हें भोपाल में सरकारी आवास दिया जाए। हालांकि आवास मिलते-मिलते उन्हें ढाई साल बीत गए। उन्होंने कांग्रेस सरकार में फिर बंगले की मांग की लेकिन ये मांग 15 महीने अटकी रही। राज्य में दोबारा भाजपा की सरकार बनने के दस महीने बाद उन्हें बंगला आवंटित किया गया है।

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बनें उमा भारती और दिग्विजय के पड़ोसी
शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने सिंधिया को श्यामला हिल्स पर बी-5 बंगला आवंटित किया है। यहां पूर्व मंत्री हनी सिंह बघेल रहा करते थे। भाजपा सांसद अब पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती (बी-6, श्यामला हिल्स) के पड़ोसी होंगे। वहीं इसी बंगले के बगल से चौथा बंगला बी-1 कांग्रेस सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का है। सिंधिया का बंगला उमा और दिग्विजय से बड़ा है और डेढ़ एकड़ में फैला हुआ है।

सिंधिया ने छोड़ा दिल्ली का बंगला
लोकसभा चुनाव में हार मिलने के बाद सिंधिया ने 27 जुलाई 2019 को 27, सफदरजंग रोड पर स्थित सरकारी बंगले को खाली कर दिया था। सिंधिया परिवार के पास यह बंगला 33 सालों तक रहा था। इससे पहले सिंधिया ने भोपाल में सरकारी बंगले के लिए कभी कोई कोशिश नहीं की। चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने बंगला मांगा था। उनके नए बंगले पर रंगाई-पुताई का काम शुरू हो गया है। यहां सिंधिया का एक अलग से कार्यालय भी होगा जिसमें वे कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे।
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प्यारे मियां केस: यौन शोषण की शिकार नाबालिग ने खाईं नींद की गोलियां, तीन दिन बाद तोड़ा दम

ज्योतिरादित्य सिंधिया-शिवराज सिंह चौहान (फाइल फोटो)

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मध्यप्रदेश की राजधानी में दुष्कर्म पीड़िता ने नींद की गोलियां खाकर दी जान

मध्यप्रदेश में दुष्कर्म की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 17 वर्षीय एक कथित दुष्कर्म पीड़िता की बुधवार रात को एक अस्पताल में मौत हो गई। दुष्कर्म के इस मामले में एक अखबार का मालिक आरोपी है। एक अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

एक अधिकारी ने बताया कि किशोरी ने यहां सरकारी बालिका आश्रय गृह में नींद की गोलियां खा ली थीं, इसके बाद उसे सोमवार रात को गंभीर हालत में सरकारी हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिला प्रशासन ने बुधवार को ही इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आई डी चौरसिया ने गुरवार को बताया कि किशोरी को सोमवार रात को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, बुधवार रात को उसकी मौत हो गई। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

बता दें कि पिछले साल जुलाई में स्थानीय अखबार चलाने वाले 68 वर्षीय प्यारे मियां के खिलाफ पांच नाबालिग लड़कियों के साथ बलात्कार करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। 

पांच पीड़ित बालिकाओं में से एक थी पीड़िता 
पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) उपेन्द्र जैन ने बताया कि जिस लड़की ने सोमवार रात को नींद की गोलियां खाई थीं, वह इन पांच पीड़ित बालिकाओं में से एक थी। उन्होंने बताया कि पीड़ित लड़कियों को सुरक्षा के मद्देनजर सरकारी बालिका आश्रय गृह में रखा गया था, इनमें से दो बालिकाओं की तबीयत सोमवार रात को बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।उन्होंने बताया कि इनमें से एक लड़की की हालत बेहद नाज़ुक होने पर सोमवार रात को ही उसे हमीदिया अस्पताल रेफर किया गया था।

आईजी ने बताया कि घटना के बाद जिलाधिकारी ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही असली तस्वीर सामने आएगी। इस बीच, कमला नगर थाना प्रभारी विजय सिसोदिया ने गुरुवार को बताया कि अत्यधिक मात्रा में नींद की गोलियों का सेवन करने वाली दुष्कर्म पीड़िता का हमीदिया अस्पताल में उपचार किया जा रहा था, लेकिन बुधवार रात को अस्पताल में उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जा रहा है कि आश्रय गृह में उसे नींद की गोलियां कैसे मिलीं।

बता दें कि पिछले साल जुलाई में भोपाल के रातिबाड़ इलाके में पांच लड़कियों के नशे की हालत में घूमने के बाद प्यारे मियां और उसकी साथी स्वीटी विश्वकर्मा (21) के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। मियां पर आरोप है कि उसने नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण किया। पुलिस ने बाद में उसे जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार किया था।
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